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There are 8 टिप्पणियाँ for वेणु गोपाल की एक कविता
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sundar wyangy hai. badhai bhai is kavita ko post krne ke liye.
maja aaya ...mejedar hai venu gopal jee ko padhna hamesha hi panch shot ki tarah raha hai
‘ज़िंदगी के बारे में
कुछ कहने से पहले
ज़िंदगी जिए
वरना चुपचाप रहे
होठ सिये..’
अब क्या कहा जा सकता है...
धन्यवाद...
kaash ye aapne bhi nhi likha hota.. ye maine likha hota...
मुझे याद नही आ रहा कि वेणुगोपाल की यह कविता कब पढ़ी है । लेकिन यह वेनुगोपाल के संग्रह "वे हाथ होते है " के आसपास के करीब की कविता प्रतीत होती है शायद अकविता के दौर के बाद की कविता । जहाँ न पहुंचे रवि जैसी सर्वव्यापी उक्ति के जवाब मे यह एकमात्र कविता है । प्रस्तुति के लिये धन्यवाद ।
mere dost ki yaad dilane ke liye shukriya
छोटी पर अच्छी कविता है. चयन के लिए बधाई.
आख़िर कवि है वह
और कसूर आपका है
कि आप ही ने बता रखा है उसे
कि वह वहाँ पहुँच सकता है
जहाँ रवि नहीं पहुँच सकता।
छोटी पर अच्छी कविता.
Halanki यह कविता पढ़ी है