वेणु गोपाल की एक कविता

प्रस्तुतकर्ता अशोक कुमार पाण्डेय | लेबल: , | Posted On 3-10-09 at 9:40 am



यह आपकी ग़लत मांग है कवि से

यह
आपकी ग़लत मांग है
कवि से
कि वह ख़रीदकर
शराब पिए

ज़िन्दगी के बारे में
कुछ कहने से पहले
जिन्दगी जिए

वरना चुपचाप रहे
होठ सिये

आख़िर कवि है वह
और कसूर आपका है
कि आप ही ने बता रखा है उसे

कि वह वहाँ पहुँच सकता है
जहाँ रवि नहीं पहुँच सकता।

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